Wednesday, February 9, 2011

जंगल राज ---ब्यंग.

जंगल - राज में बार्षिक महोत्सव का  आयोजन किया गया था.थल-चर ,नभ-चर और जल-चर नेताओ को निमंत्रण जा चूका था.निर्धारित तिथि को सब लोग ,यथा बिधि उपस्थित हुए.!जंगल के राजा शेर को अध्यक्ष बनाया गया.सभा की शुरुआत  कोयल के मधुर -गीत से हुआ !
             सभी जानवर शांत बैठे हुए थे !कोई किसी को सीधे नहीं देखना चाहता था !छोटे - छोटे जानवर भीड़ के पीछे या किनारे दुबके बैठे थे.पक्षी अपने कलरव को छोड़, चारो तरफ छितराए हुए थे !कुछ दिल से ,तो कुछ न चाह कर भी हाजिर हुए थे !...देखे  आखिर होता है क्या  ?
            शेर के सामने ,यह सभा किसी खतरे से खली नहीं थी  !कहते है-अफसर के सामने और गदहे के पीछे कभी नहीं रहना चाहिए,न जाने कब क्या हो जाये !  चर्चा का विषय इस बरस के वार्षिक -सम्मान से था !
 हाथी ने चिल्ला कर इस बरस के लिए नामांकन का प्रस्ताव ,पेश करने को कहा ! 
         मधुरभाषी  तोते ने कहा- "आप बड़े लोग ही फैसला ले ,तो बहुत अच्छा होगा ".    किसी ने कुछ कहने से परहेज किया तो सियार को न रहा गया...बोला-"मैंने सम्मान की जाँच रिपोर्ट ,अध्यक्ष महोदय को सौप दी है ..."
         "साला चापलुश है क्यों नहीं देगा ...." भेड़िये ने चुटकी ली .
    " तुम भी तो वही हो ...." बकरी ने कटाक्ष ली.
    शेर ने बकरी को तिरछी नजरो से देखा .......और मंद-मंद मुस्कुराया. कहा-" क्यों न बकरी को स्वर्ण सम्मान से सुशोभित किया जाय."
     कुत्ता बुदबुदाया ----"क्यों न...... पेट जो भरती है    "
    इस बर्ष का सम्मान ....शाकाहारियो को दी जानी चाहिए ! "---हाथी ने कहा .  " इसके लिए उपयुक्त नाम जिराफ का ही रहेगा  "
    चर्चा जोर से चली.सभी ने जोर-शोर से बोलना शुरू किया ...इसी बीच गीदड़  और सियार ..तू-तू..मै-मै कर आपस में लड़ बैठे.!अंत में तीन जानवरों को गोल्ड,सिल्वर और कास्य पदक के लिए चुना गया !शेर महाशय  गुर्राते हुए मंच पर खड़े हुए और सम्मान के लिए नाम की उदघोशना की !
    कास्य पदक ......मिस्टर ..श्री घोड़े साहब .....!
   सिल्वर पदक .....मिस्टर..श्री गदहा ..............! और 
   स्वर्ण पदक के लिए ...मिस्टर श्री कुत्ता जी ...!  अंत में शेर महाशय ने कहा की ये हमारे बहुत उपयोगी और पालतू ब्यक्ति है ,जिनकी सेवा हम कभी नहीं भूल सकते.....  इतना ही नहीं .......ये हमेश .....हम लोगो की सेवा के लिए तैयार रहते है !
      " अँधेरी नगरी- चौपट राजा..." किसी ने बुदबुदाया . सभी दबी जुबान से हंस पड़े.............

9 comments:

  1. कमाल का व्यंग....सटीक बात

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  2. Aapki lekhni ka jauhar pahli baar dekha aur prabhaavit hua... badhaai sir

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  3. कमाल का व्यंग....सटीक बात|

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  4. " अँधेरी नगरी- चौपट राजा..."

    bahut khub likha aapne.....

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  5. कहने का बहाना अच्छा है

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  6. कटु सत्य को उजागर करती यह हास्य-व्यंग अपने आप में सम्पूर्ण व्यवस्था और लोभी प्रवृत्ति पर करार व्यंग है. अपने उद्देश्य और सम्प्रेषण में सार्थक. बहुत-बहुत धन्यवाद..

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  7. सुन्दर व्यंग लघुकथा की शक्ल में.
    मज़ा आ गया.

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