Saturday, September 24, 2016

माँ वैष्णो देवी यात्रा -3


कटरा से जम्मू सड़क मार्ग में एक सुरंग । 
आज दिनांक 5वी मई 2016 है । आज कोई प्रोग्राम नहीं था क्योंकि माता जी का दर्शन कल पूरी हो गयी थी । यहाँ से वापसी भी 6 तारीख को था । 24 घंटे व्यर्थ न जाये , अतः कुछ भ्रमण की तैयारी करना जरुरी लग रहा था । हमने निर्णय लिया कि क्यों न सड़क मार्ग से जम्मू चला जाय । ये कश्मीर है । एक समय था जब इसे भारत वर्ष का स्वर्ग के नाम से जानते थे । आज वह खोता नजर आ रहा है । जिधर देखो उधर डर का माहौल व्याप्त है ।आतंकवादी गतिविधियों में तेजी आ गयी है । कब क्या हो जायेगा , कोई तय नहीं कर सकता । इसकी आशंका होटल मालिक ने कर दूर कर दी । उसने कहा की आप आराम से बिना भय के कटरा से जम्मू जाएँ । कोई परेशानी नहीं होगी । कहे तो मैं टूरिस्ट कार की व्यवस्था कर देता हूँ । यह भी बिलकुल साठीक सुझाव था । किसी अनजाने की कार को भाड़े पर ले जाना ठीक नहीं था । हमने होटल टुडे के माध्यम से एक कार किराये पर ली । भ्रमण कराते हुए जम्मू तक छोड़ने का 1500/- रुपये । चलो ठीक है । करार हुयी और हमने अपनी यात्रा 10 बजे से शुरू की । हमने अपने पुरे सामान कार में रख दिए और होटल टुडे को अलबिदा कहा ।

हमने मन ही मन बैष्णो माताजी को प्रणाम किये और सुख शांति की दुआ की आग्रह के साथ फिर दुबारा आने की लालसा व्यक्त की । कार कटरा के छोटी छोटी गलियो से होते हुए शहर से बाहर निकला  मुझे ट्रेन की सफ़र तो पसंद
 है ही , पर कार की मजा अलग ही होती है । हम सब कुछ करीब से देख और परख सकते है ।कार  दोहरी सड़क पर दौड़ने लगी । चारो तरफ हरियाली ही नजर आ रही थी जबकि गर्मी का मौसम था । इन वादियो के नज़ारे बरसात में देखते ही बनते होंगे । जंगलो और झाड़ियो में गाँव दिखाई दे रहे थे किन्तु प्रत्येक घर एक दूसरे से दुरी पर थे । वीरान और सुनसान सा । इसीलिए आतंकवादियो के मनसूबे सफल हो जाते है । जेहन में एक तरह से डर भी लग रहा था और आनंद भी । चलते चलते कई पिक भी लिया गया ।

सेल्फ़ी लेने में मजा है या अपनी जिगर की चाहत । क्या हम अच्छे लगते है । ये भी एक आधुनिकता की पहचान है । आये दिन इस कृत से कईयो की जाने भी जा चुकी है । हमारी यात्रा आगे बढती रही । सडको के किनारे हरियाली और नयी नवेली सड़क मुग्ध कर रही थी । सड़क यात्रा के दौरान मंदिर और संग्रहालय व् एक छोटा सा चिड़ियाघर दिखा । रास्ते में ही कौल कंडाली माता बैष्णो देवी जी का मंदिर है । इस जगह से माता जी का लगाव था । कहते है की इसके दर्शन भी बैष्णो माँ के दर्शन पुरे कर देते है । यह मंदिर यहाँ के लोकल लोगो के प्रबवधन में है । साफ सुथरा है । यहाँ एक कुँआ भी है जिसके पानी पिने से फल की प्राप्ति होती है । मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता । आप खुद ही पिक और विवरण को पढ़ जानकारी प्राप्त कर सकते है । 
जूम कीजिये और विवरण पढ़िए ।
जूम कीजिये और विवरण पढ़िए ।
जूम कीजिये और विवरण पढ़िए ।
जम्मू घाटी की एक सुखी बरसाती नदी ।
ये एक कश्मीरी राजा के बंशजो द्वारा बनायीं गयी अमर महल संग्रहालय है । इसे हरी तारा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है । जिसमे उनके कुछ परिवारो की तस्वीर प्रदर्शित है । श्रीकरण सिंह । एक सोने का सिंहासन  भी है । इसके अंदर जाने का किराया मात्र 20 रुपये प्रति व्यक्ति है । एक तरफ नदी तो दूसरी तरफ हरी भरी फुलवारी है । कार , मोटर या टूरिस्ट बसो के लिए पार्किंग भी है । जीवन में बहुत से म्यूजियम देखे है किन्तु यहाँ निराशा ही हाथ लगी ।  इसके आस पास के बगीचे में घुमे । आम के पेड़ो पर मोजर आ गए थे । चौकीदार छूने नहीं दे रहे थे । यहाँ से निकल कर चिड़ियाघर पहुंचे । यहाँ भी इक्के दुक्के पक्षी और कुछ बाघ के सिवा कुछ नहीं था । 
अब हम जम्मू शहर में आ गए थे । यहाँ एक मंदिर है ।जिसे देखने गए । दरवाजे पर सिक्युरिटी वाले सब कुछ चेक किये । मोबाइल या कैमरे अंदर ले जाना मना है । हमने प्रमुख द्वार के खिड़की पर जमा कर दिए । मंदिर के अंदर कोई खास भीड़ नहीं था । मंदिर के प्रांगण में अलग अलग कई कमरे है । इन सभी कमरो में अलग अलग देवी - देवताओ की मूर्तिया है और सभी जगह एक पुजारी का ड्यूटी था । जिस मंदिर में भी गये ,  वहाँ पुजारी के मंत्रो का सामना करना पड़ा और उस के एवज कुछ न कुछ दक्षिणा देना पड़ा । प्रभु के भोग या गरीब अन्न दान के स्वरूप  । जो एक पारंपरिक रिवाज है । 
जो भी हो भगवान सबके दाता है । जो नसीब में होगा भाग कर आएगा। जो नहीं होगा वह लाख चतुराई के बाद भी चला जायेगा ।
दोपहर के दो बजने वाले थे । कोई विशेष दर्शनीय स्थान न होने की वजह से यात्रा समाप्त करनी पड़ी । अतः हम आश्रय के लिए एक लॉज में गए । जो रेलवे स्टेशन के ही नजदीक था । शाम के समय बाजार में खरीददारी हुई । लेकिन हाँ यहाँ जेहन में हमेशा डर सत्ता रहा था । ये कश्मीर है पहले जैसा नहीं । अब कल की यात्रा यानि 6 मई 2016 - अगले कड़ी में । इसे जरूर पढियेगा । यह मेरे जीवन का एक अजूबा था या भूल । कुछ कह नहीं सकता ।
अब फिर मिलेंगे " माँ वैष्णो देवी यात्रा - 4 " में 



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