Friday, July 31, 2026

क्या स्वपन भी सच्चे होते है ?

                                                                
     मै वाडी से २१६४ एक्सप्रेस आज ( तारीख -०२-१२-२०१० ) आने वाला था.मै वाडी लोको चालक आराम गृह में गहरी निद्रा में सोया हुआ था.अतः सुबह ०६ बजे कॉल बॉय आकर मुझे उठाया क्यों की ट्रेन राईट टाइम चल रही थी.

      मै उठ तो गया , किन्तु किसी गहरे स्वप्न में खोया था.पूरा सीन याद नहीं आ रहा है ,पर आखिरी वाक्य याद है--वह यह की-मुख में राम , बगल में छुरी. जैसा की बिदित है और मेरे साथ होता आया है ,इस लिए मै इस वाक्य की ब्याख्या करता रहा.पर कुछ नतीजे पर नहीं पहुंचा.

   पूरी तैयारी  और नास्ता वगैरह करके, ड्यूटी पर आ गया.ट्रेन समय पर आई और समय से वाडी छुटी.यात्रा होती रही .रायचूर आने पर ,मेरे सहायक लोको चालक श्री प,ज,खान ने एक मछुवारे को जो मन्त्रालयम रोड में रहता है को फोन किया और कहा की मुझे २ किलो मछली चाहिए ,तैयार रखो.

       मछली वाले ने मेरे लिए भी मछली लाने के लिए पूछा.मैंने नं कर दी क्यों की मै प्रायः ब्रिह्स्पतिवार को नॉन veg नहीं  लेता वैसे आज ब्रिह्सपतिवार ही है.ट्रेन नियत समय से मन्त्रालयम रोड आई  ( यानि साढ़े नौ बजे. ) हम अपने लोको की जाँच -परताल कर रहे थे,तभी मछली वाला दो पैकेट  के साथ,आ हाजिर हुआ.पहला थैला उसने मेरे सहायक को दी और दुसरे के साथ मेरे नजदीक आया और कहा सर ,ये मछली मैंने आप के लिए लायी है.देखिये सभी मछलिय जिन्दा है.ताजी की ताजी है.
       मुझे आज कौन सा दिन है का ख्याल नहीं रहा और मैंने उस मछली के पैकेट को लेकर लोको के अन्दर रख दिया .गुंतकल आने में डेढ़ घंटे की देरी थी .मेरे सहायक लोको चालक की मछली को मछुवारे ने काट और साफ़ करके लाया था. उसे घर जाकर बनाने भर का काम था.

        रास्ते में मुझे याद आया, कल मै घर पर नहीं रहूँगा क्यों की आज रात को कर्नाटक एक्सप्रेस काम करनी है.चलो मछली को साफ करके फ्रिज मै रखना पड़ेगा .दुसरे दिन  परिवार वाले खा लेंगे.जैसे ही काटने की बात मुझे याद आई,स्वप्न वाली वाक्य याद आ गई.---मुख में राम , बगल में छुरी.

        अर्थार्त अब  इस वाक्य की ब्याख्या मेरे  सामने प्रस्तुत थी.यानि मुख में राम= मै ब्रिह्स्पतिवार को नान-veg नहीं लेता क्यों की साईं बाबा ( शिरडी वाले ) को बहुत मनाता हूँ और बगल में छुरी =का मतलब साफ है ,मछली मेरे साथ है उसे छुरी से काट कर तैयार करने होंगे.

          मै अपने किये पर शर्मिंदा हुआ और साईं बाबा को मन ही मन याद कर क्षमा मांगी.घर आने पर पत्नी ने बैग को देखते ही मुझे बहुत कोसा.मुझे भरपूर फटकार मिली,उसने मुझे हिदायत देते हुए कहा है की आइन्दा ऐसी गलती न होनी चाहिए |  

          (नोट-जरुरी नहीं जो मुझे स्वप्न में दिखी वह सभी के साथ हो,और उनके भी स्वप्न सिद्ध हो,पर यह मेरी अपनी अनुभव है कारण करम अपने - अपने ) यह स्वपन भी सच्चे हुए. 

क्या कुत्ते भी आत्महत्या करते है ?

      मै आज २१६३ एक्सप्रेस काम करके अभी -अभी आया हूँ.मन में कुछ सुझा तो ब्लॉग लिखने बैठ गया .सोंचता हूँ -आदमी को आदमी नाम किसने पहले-पहले दिया. कुत्ते को कुत्ता क्यों कहा जाता है? बाघ को आखिर बाघ क्यों कहा जाता है ?मुर्गी को मुर्गी ही क्यों ?पौधों को तरह - तरह के नाम क्यों. हिरन को हिरन ही क्यों गधा क्यों नहीं ?  बगैरह -बगैरह.....इससे ऊपर यह की सभी का नामकरण ,सबसे पहले दुनिया में किसने किया ? उसके पीछे उसका मकसद क्यों और कैसा था ?
            मुझे तो नहीं पत्ता.पर एक बिस्वास जरुर है .क्यों की हमारे पूर्वजो ने इस नाम को वहन करके ,यहाँ तक लाये है.जिसे समझना ,न समझना मेरे ऊपर निर्भर करता है.इस तरह देखा जाय तो दुनिया में बहुत सी चीजे मिल जाएँगी जिन्हें हम अपने पुर्बजो के द्वारा लायी समझते है.और दिल से बिस्वास भी करते है.अगर नाम करन के पीछे कोई धारणा हो और किसी को कुछ मालूम हो तो मुझे भी बताने की कृपा करें. 
                  मै बिषय से दूर चला जा रहा था ,अब आये कुत्ते की बात करे.किसी को कुत्ता कहने से लोग क्या समझते है. फिर भी कुत्ते को लोग बड़े प्यार से पालते है.कुत्ता पालतू होते है.फिर भी इनके नाम को कुत्ता ,रखने के पीछे क्या मनसा रही होगी.?  आज हुआ यूँ की मेरे ट्रेन के निचे एक कुत्ता मर गया .कुत्ते का ट्रेन के निचे आना कोई नयी बात नहीं है.प्रायः ऐसा होता रहता है ,किन्तु आज जो हुआ ,वह बिलकुल अलग सा था.क्यों की वह कुत्ता लगातार सिटी बजने के बावजूद भी ,दोनों ट्रैक के बिच में खड़े हो कर  ट्रेन को देखता रहा और टस से मस नहीं हुआ.जब की ऐसा कभी नहीं होता है.कुत्ते का स्वभाव है की जरा सी आवाज हुई की भगा.अंत में मै यही सोंचता हूँ की क्या कुत्ते भी मनुष्य जैसा आत्महत्या करते है ?अगर हाँ तो क्यों ?
      

एक लघु कथा - पिघलती ममता

मुंशी प्रेमचंद पुस्तकालय -अपने  आप में एक अलग ही महत्त्व रखता है । इस पुस्तकालय में  एक साथ  पचासों लोग  बैठ सकते है । शिप्रा एक विदुषी महिला  थी । सामाजिक , राजनितिक , आर्थिक और देश -विदेश की समस्याओ में विशेष रूचि । इस पुस्तकालय के  सभी पाठको में बहुत लोकप्रिय । वह अपने एकलौते पांच वर्षीय पुत्र के  साथ नियमित पुस्तकालय में शरीक होती थी । बहुत ही मृदुल भाषी , शांत स्वाभाव वाली ।  उसका पुत्र भी सभी का प्यारा था । 

एक दिन हरीश ने उनके   पुत्र के सिर पर टोपी  रखते हुए -" टोपी " कह  दिया । शिप्रा के मुख की रेखाए तन गयी । माँ का कोमल दिल , पुत्र के प्रति इस्तेमाल  विशेषण के शव्द से आहत हो गया ।  मर्माहत सा टोपी को दूर फेंकते हुए ,पुस्तकालय से बाहर निकल  गयी । हरीश समझ न सका ? सन्न रह गया । समझ नहीं पाया कि उससे कौन सी गलती हो गयी   है । वैसे टोपी सिर की शोभा और  इज्जत बढाने वाली वस्तु  है । पैर पर थोड़े ही रखी जाती है ? एक माँ की ममता को ठेस पहुंचे , ऐसी  हरीश की इच्छा नहीं थी , महज प्यार से कह दिया था । एक इत्तेफाक था । 

पुस्तकालय में शिप्रा की उपस्थिति दिन प्रतिदिन कम होने लगी । सभी को उसकी कमी खलने लगी थी  । हरीश ने तय किया कि अवसर मिलने पर शिप्रा से गलती के लिए खेद प्रकट करेगा । वह अवसर की  ताक में था । आज पुस्तकालय के सभागार में एक समारोह का आयोजन किया गया था । शायद पुस्तकालय के एक  वार्षिक मैगजीन की लोकार्पण होने वाली थी । हरीश भी उपस्थित था । मैगजीन को आम पब्लिक हेतु लोकार्पित  किया गया । हरीश मैगजीन का मुखपृष्ट देख आश्चर्य चकित हो गया -" मुखपृष्ट पर शिप्रा के पुत्र की तश्वीर छपी थी । "

भीड़ में उसे शिप्रा दिखी । क्षमा हेतु इससे अच्छा अवसर और क्या हो सकता है  । हरीश ने तपाक से कहा - " आप एक श्रेष्टतम माँ है ।" और शिप्रा कुछ कहे , तब - तक वह  आँखों से ओझल हो गया । एक माँ का कोमल मन हर्षित हो उठा ।  शिप्रा के मन में अमृत का संचार हो चूका था । एक माँ की ममता पिघलने लगी थी । वह पुस्तकालय फिरसे गुंजित होने लगा । 

एक शब्द कडुवाहट ,नफ़रत और  प्यार  को  फ़ैलाने के लिए काफी होते है । अंतर उसके उपयोग में है  । इसकी पीड़ा सभी नहीं , कोई माँ  ही समझ सकती  है । 

Saturday, July 18, 2026

Hindi Song - Kisi Raah Mein Kisi Mor Per - Lata Mangeshkar /Mukesh


लताजी को उनके जन्म दिन की बधाई हो.......

चैट कीजिये ।

मैं पत्नी को देखते ही मोबाइल के स्क्रीन को तुरंत बदल दिया किन्तु पत्नी को समझते देर न लगी । चैट कीजिये - वह बिना किसी संकोच के बोली । मेरी ख़ामोशी को भाप गयी। बोली - मुझे कोई ऐतराज नहीं है । आप तो स्वयं समझदार है । आप कोई गलती नहीं कर सकते । मुझे पूरा भरोसा है । ये कह कर न जाने क्यों फिर जिधर से आई थी उधर ही चली गयी । आज सूर्य पूर्व के सिवाय पश्चिम से उदय होता नजर आया । वह पत्नी जो चैट के नाम पर क्रोध करती और आग बबूला हो जाया करती थी वही चैट करने के लिए स्वतंत्र रूप से आजादी दे रही थी । मैं आश्चर्य चकित था । पत्नी जी फिर  चाय के प्याले के साथ उपस्थित हुई । मुझसे रहा न गया , बरबस साहस कर पूछ ही लिया । देवी जी आज कैसे खुश हुई कोई कारण ? चाय का प्याला मेरे सामने रखते हुए बोली - वही जयपुर वाली आप की बेटी । बहुत सुन्दर और रहन दार है । भगवान ऐसी ही बेटी सभी को दें । फिर एक क्षण के लिए रुकी और एक लंबी साँस लेते हुए बोलीं - भगवान भी कितना अन्याय करते है । कुछ न कुछ कमी सभी को देते है । काश उसे जबान दी होती । इतना कहने के बाद उसका गला  भर आया । मैं कुछ नहीं बोल सका बस निःशब्द हो खयालो में खो गया ।

ये उन दिनों की बात है । जब मैं एंड्राइड स्मार्ट फोन का इस्तेमाल शुरू किया था । नई यांत्रिकी थी । नेट में तैरना अच्छा लगता था । एक मुठ्ठी भर का  यंत्र काफी कुछ के लिए मदद गार  था । उस दिन मैं सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 10 पर बैठा था । राजधानी एक्सप्रेस लेकर जाना था । ट्रेन आने में देरी थी अतः समय वश व्हाट्सप्प पर टहल रहा था । देखा एक अनजान व्यक्ति का कुछ मैसेज वेटिंग में था । पढना शुरू किया तभी एक मैसेज डिस्प्ले हुआ । आप क्या कर रहे है । मैंने उस अज्ञात व्यक्ति की परिचय पूछा । जबाब मिला मैं लक्ष्मी देव हूँ जयपुर से । फिर कल मिलेंगे - कह कर , मैंने मोबाइल बंद कर दी । मेरी ट्रेन आ चुकी थी ।

दूसरे दिन सुबह सोकर उठा । आदत वस सबसे पहले मोबाइल नेट को देखना शुरू किया । देखा लक्ष्मी देव ने कई चुटकुले और पिक पोस्ट किये थे । पढ़ा और बहुत आनंदित हुआ । अनचाहे मन से रिप्लाई भी पोस्ट कर दी - अच्छे लगे । वैसे व्हाट्सप्प के कई दोस्त और ग्रुप है जिन्हें रोज  पढ़ते रहता हूँ । इस दौरान मैंने लक्ष्मी देव की टिप्पणी देखी जो इस तरह की थी ~ " जय जवान जय किसान जय चालक । आप की डयुटी एक फौजी से कम नही है । अच्छा लिखते है आप सब drivers भाईयो को सलाम । जिस वक्त हम अपने बिस्तरो मे दुबके हुये रहते है उस वक्त आप हमारे लिये पटरियो पर सघर्ष करते है और और रेल संचालन का परिपूर्ण रूप से करते है " टिप्पणी पढ़ कर मन गदगद होना स्वाभाविक था । जीवन में पहली बार किसी ने जय जवान जय किसान स्लोगन के साथ जय चालक शव्द को जोड़ा था ।

मेरी जिज्ञासा लक्ष्मी देव के बारे में जानने की हुई । मैंने एक दिन पूछा - आप क्या करते है । जबाब मिला ~ मैं हाउसवाइफ हूँ । मेरे पति व्यापारी है । मेरे कान खड़े हो गए । आज तक मैं जिस व्यक्ति को पुरुष समझ रहा था वह एक महिला निकली । कहानी यही ख़त्म नहीं हुई । एक पुरुष और महिला का आकर्षण सर्व बिदित है । फिर क्या था । दिनोदिन चैट का सिलसिला शुरू हो गया । इस दौरान हम दोनों एक दूसरे के बारे में काफी जान चुके थे । घर गृहस्थी          हो या पारिवारिक लोग  या सामाजिक तंत्र या स्थानीय शहर या पति पत्नी और  हमारे बच्चे सभी के बारे में हम दोनों को एक दूसरे के बारे में पूरी जानकारी हो चुकी थी । प्रतिदिन कोई न कोई एक नए विषय पर चैट होती थी ।कभी कभी पत्नी भी बगल में बैठे होने के नाते मैं क्या कर रहा हूँ को समझ जाती थी ।अतः  पत्नी को भी इस बात की जानकारी दे दी थी। पहले तो वह गुस्सा हुई पर नरम पड़ गयी जब उसे यह मालूम हुआ कि मैं लक्ष्मी देव को एक पुत्री के रूप में स्वीकार किया  हूँ  । और यह सही भी था क्योंकि कि लक्ष्मी देव और मुझमे स्वच्छ चैट ही होते थे । एक बार मैंने एक वीडियो सांग लक्ष्मी देवको भेजी । लक्ष्मी ने उसके गलत अर्थ लगाते हुए मुझे कोसे थे । उस समय मैंने उसे समझते हुए कहा था कि किसी चीज का अर्थ हमारे मानसिक सोच पर निर्भर करता है । गलत सोच गलत और सही सोच सही मार्ग पर ले जाते है । उसके बाद लक्ष्मी देव ने अपने गलती का एहसास की थी ।

चैटिंग के साथ ही हम दोनों के पारिवारिक रिश्ते भी सुदृढ़ हो गए । किन्तु कोई भी एक दूसरे को प्रत्यक्ष न देखा था न ही कभी मिला था । लक्ष्मी देव अपने परिवार में काफी खुश थी और कोई आभाव महसूस नहीं करती थी । सभी उन्हें प्यार करते थे । मैंने कई बार फोन पर बात करना चाही पर लक्ष्मी देव को ये पसंद नहीं था । मेरी पत्नी भी एब बार बात करने की इच्छा जाहिर की , पर बाद में फिर कभी कह कर लक्ष्मी देव मुकर गयी । उनके परिवार में एक दबंग थी उनकी एकलौती सास , जिससे काफी डरती थी । एक बार उन्होंने अपने घूँघट को नाक तक चढ़ा ली थी जिससे उनकी सास कुपित हो बड़ी मार मारी  थी । आखिर घर की मालकिन सास ही थी किसी भी मर्द की नहीं चलती थी । एक तरह से मेरा अनुभव ये कहता है कि जिस घर की मालकिन औरत होती है उस घर में झगड़े और कलह नामात्र के होती है । लक्ष्मी देव को कई बार सेल्फ़ी भेजने की विनती की पर वह इसे भी इंकार कर दी यह कहकर की लोग पिक का गलत इस्तेमाल करते है । मैंने भी कोई जिद्द नहीं की थी ।

हम दोनों की दिल्ली इच्छा थी की किसी जगह मिले । मैं जा सकता था पर लक्ष्मी देव जयपुर छोड़ कही नही जा सकती थी ।  कहते है समय बहुत बलवान होता है । जिसे चाहे मिला दे या अलग भी कर दे । किसी की वश नहीं चलता । मुझे किसी काम वश जोधपुर जाना था । लक्ष्मी देव से संपर्क किया और पूछा की अगर वो जयपुर में मिल सकती है तो मैं एक दिन के लिए जयपुर रुकने के लिए तैयार हूँ । जैसे मैंने लक्ष्मी देव की , उनके मुहं की बात छीन ली हो , वह तुरंत तैयार हो गयी । मुझे भो आत्मशांति मिली चलो अब उन्हें प्रत्यक्ष देख पाउँगा । आज तक केवल चैट और कल्पनाओ की आँख से ही देखता था । कभी भी वह सेल्फ़ी या कोई पिक भेजने से इंकार करती रही थी । अब सामने खड़ी होगी और हम खूब बात करेंगे । मन की दुविधा दूर हो जायेगी ।

मैं जयपुर पहुँच गया था । अपने होटल के कमरे में सपरिवार ठहरा था । पत्नी भी जल्द तैयार हो गयी थी। लक्ष्मी देव की आगवानी जो करनी थी । दस बजने वाले थे । हम सभी आतुरता से उनकी  इंतजार में बैठे थे । मैं बेचैन था क्योंकि अब तक मैं उसे औरत नहीं समझ सका था । मेरे दिमाग में एक ही बात घुसी हुयी थी कि ये कोई पुरुष ही है जो मुझे औरत के रूप में चैट कर ब्लैकमेल कर रहा है । इसकी पुष्टि भी आज हो जायेगी । उसने दस बजे तक आने की वचन दी थी । बार बार घडी पर नजर जा रही थी अब साढ़े दस बजने वाले थे । सब झूठ है । वह धोकेबाज है । वह नहीं आएगी । वह आप से चैट तक ही सम्बन्ध रखना चाहती है । पत्नी भी मायूस हो शव्दों की प्रश्न चिन्ह खड़ी कर दी । मैं भी अशांत समुद्री लहर सा चुप चाप सुनता रहा । तभी किसी के दरवाज़े को ठोकने की ध्वनि सुनाई दी । अन्मयस्क सा उठा , बेयरा होगा बुदबुदाया और दरवाजे की तरफ बढ़ गया । ग्यारह बजने वाले थे । दरवाजा खोला । सामने चार लोगो को खड़े पाया । एक गोरी सी खूबसूरत महिला एक जवान पुरुष और दो छोटे बच्चे । कुछ देर के लिए खामोश । क्या वही चैट वाली प्रोफाइल वाली औरत सामने खड़ी है ? पत्नी को आवाज लगाई  । इधर आना । वे लोग मुझे घूरते रहे या हो सकता है वे भी मुझे सही पहचानने की कोशिश कर रहे  थे । पत्नी बगल में आ खड़ी हुई थी । आप ही लक्ष्मी देव है ? मैंने औरत की तरफ अंगुली से इशारा करते हुए पूछा । जबाब के वजाय वह औरत झुक कर हम दोनों के पैर छु लिए । मुझे जबाब मिल चूका था । पत्नी ने उन्हें अंदर आने की अनुग्रह की । हमारे साथ वे लोग अंदर आ गए । हमने उन्हें सोफे पर बैठने का  आग्रह  किया और बगल में ही बैठ गए ।


अंकल ये है मेरी पत्नी लक्ष्मी देव और ये दोनों पुत्र विवेक और शिवांग । मेरा नाम विजय है । आप सभी से मिलकर ख़ुशी हुई । लक्ष्मी देव जी आप को कैसा लग रहा है। चैट तो दमदार करती है । मैंने बेहिचक अपने वाक्य कह दिए । लक्ष्मी देव बिलकुल शांत बैठी रही और अपने पैर की अंगुलियो को ध्यान से सर झुकाये देख रही थी । जी लक्ष्मी कैसी हो ? अब खुल कर बात करो न ? पत्नी ने सवाल किये । मम्मी बोल नहीं सकती - शिवांग ने कहा । क्या ? हम दोनों के मुख से ये शव्द निकले । जी अंकल ये सही है - विजय ने कहा । देखा लक्ष्मी के हाथ में एक नॉट बुक था । अपने पति की जेब से कलम निकल कर कुछ लिखने लगी और हमारे तरफ पलट दिया । लिखा था - सॉरी अंकल ये सही है । मैं बचपन से ही गूंगी हूँ । बोल नहीं सकती । मैं यह आप से छुपाये रखा । कृपया क्षमा करे । हमदोनो पति - पत्नी की आँखे भर आई । देखा लक्ष्मी भी रो रही थी । पत्नी खुद रोते हुए उसे चुप कराने लगी । आज हम जीवन में एक अजीब सच्चाई से सामना कर रहे थे जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी । अब समझ में आ गया था आखिर लक्ष्मी फ़ोन में बात करने से क्यों कतरा रही थी । हे भगवान आप ने बिन आवाज ऐसी खूबसूरत मूर्ती क्यों बना दी । लक्ष्मी साक्षात् दुर्गा की मूर्ती लग रही थी । बस कमी एक ध्वनि की थी । आप से चैट कर के लक्ष्मी बहुत खुश रहती है अंकल । मुझे सब मालूम था । मैंने चैट करने की अनुमति दे रखी थी । विजय ने कहा । मैंने पूछा - आप लोग मुझे पहले क्यों नहीं बताये की लक्ष्मी देव बात नहीं कर सकती ?  विजय ने कहा - अंकल लक्ष्मी आप की ब्लॉग बहुत पसंद करती है । एक लेखक  से चैट करके इसे गर्व महसूस होता है । लक्ष्मी ने नॉट बुक में  कुछ लिखी और मेरे तरफ मोड़ दी लिखा था - " हमें डर था कहीँ असलियत का पता चलते ही आप चैट बंद कर देंगे । इसीलिए हमने आप को इसकी खबर नहीं होने दी । " एक पाठक मुझसे चैट कर इतना खुश था , जान कर बहुत हर्ष हुआ । मैंने कहा - एक लेखक बहुत ही संवेदनशील होता है । लेखक हमेशा जोड़ता है , तोड़ता नहीं । हमारी आँखे सुखने का नाम ही नहीं ले रही थी । सबसे ज्यादा पत्नी का जो लक्ष्मी का सिर गोद में रख कर एक माँ जैसा प्यार न्योछावर कर रही थी । दुर्लभ दृश्य ।

बेयरा भोजन की सामग्री रख कर चला गया था । दोपहर का भोजन हो चूका था । हमलोगो के बिच बहुत सी बाते हुई । मैंने विजय को कहा - आप एक महान पुरुष से कम नहीं जो ऐसे दिव्यांग से शादी कर ख़ुशी से जीवन बिता रहे है । आप वास्तव में एक पूण्य के भागीदार है । विजय मुस्कुरा कर स्वीकृती दी । मैंने उन्हें अपने बेटे की शादी में आने का अनुरोध किया । लक्ष्मी अपने पति की ओर देखने लगी जैसे कह रही हो - जबाब दीजिये । विजय ने कहा - अंकल जरूर आएंगे । इन्हें खूब पढ़ाओ बच्चों की तरफ इशारा कर कहा । लक्ष्मी नॉट बुक पर कुछ लिखने लगी और मेरे तरफ पढने के लिए बढ़ा दी । लिखा था - एक को लोको पायलट और दूसरे को प्लेन का पायलट बनाउंगी । पक्के और दृढ इरादे के आगे मैं नतमस्तक था । लक्ष्मी को देखते हुए मुस्कुरा दिया । बोला भगवान आप की मनोकामना पूरी करे । यही तो है दिव्यांग । लक्ष्मी  नॉट बुक में फिर कूछ लिखी - लिखा था मेरे बेटो के शादी में आप लोग जरूर आएंगे । हमने हामी भर दी । मजाक मजाक में मेरे मुह से निकल गया - आप की आने वाली बहुए आप को चैतानी कहेंगी । सभी खिलखिला कर हंस दिए । लक्ष्मी शर्म से मुस्कुराते हुए सिर निचे झुका ली ।

जीवन का एक अदभुद अनुभव था । शव्दों में गूँथना काफी नहीं है । उन्हें जाने देने का मन नहीं कर रहा था । मैं अपने प्रोग्राम को अधूरा छोड़ यहाँ उनके लिए रुक था । जिसका लक्ष्मी और उसके पति ने धन्यवाद जाहिर की । शाम को बिदाई के समय पत्नी ने गिफ्ट का पैकेट लक्ष्मी को दिए जिसे हमने पहले से ही तैयार रखा था । मैंने लक्ष्मी के दोनों बेटो के हाथ पर सौ सौ के नोट पकड़ा दिए । फिर एक बार लक्ष्मी ने हम दोनों के पैर छुए । हमने आशीर्वाद हेतु अपने हाथ उसके सिर पर रख दिए । जाते जाते हमने देखा लक्ष्मी की आँखे गीली हो गयी । वह अपने साड़ी के पल्लू को मुँह पर दबाएं  सपरिवार आगे बढती जा रही थी और घूम घूम कर हमें देख रही थी जैसे कह रही हो अंकल गलती माफ़ करना । हमने उसके आँखों में आंसुओ की धारा बहते देखा । हमारी आँखे भी नम हो गयी और हाथ स्वतः ऊपर उठ गए आशीर्वाद हेतु ।



(यह पोस्ट माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के " बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ " योजना को समर्पित है । यह एक समसामयिक लेख है । इसका यथार्थ से आंशिक सम्बन्ध  है । यह सत्य घटनाओ पर आधारित है नाम , जगह काल्पनिक है  । चित्र  - साभार व्हाट्सप्प )