Thursday, March 10, 2011

बाबा को पुष्पांजलि.................

                          भारत की लम्बी संत परंपरा में हम ऐसे अनेक इश्वर  भक्त  महात्माओ की गड़ना कर सकते है ,जिनका नाम मात्र  लेने से ही भक्तो के पाप नस्ट  हो जाते है  और अन्तः-करण   निर्मल हो जाता है ! ऐसी पुनीत संत परंपरा में ही महारास्त्र  के ब्रह्म लीला , संत श्री साईं नाथ महाराज की भी श्रद्धालु भक्त  बड़े आदर से स्मरण करते है ! इस महान बिभूति ने अपने जीवन काल  में लोक -कल्याण के इतने अलौकिक कार्य किये ,की मुमुक्षुओ ने ने उन्हें चमत्कार का नाम दे दिया !
          श्री साईं बाबा के चरित्र  का जो भी अध्ययन करेंगे , उन्हें ज्ञात  होगा की मानव  जाती  की ब्यवस्था से  ब्यथित होकर ,  उसका दुःख दूर करने में , श्री बाबा के जीवन का एक - एक क्षण किस प्रकार ब्यातित होता था !श्री बाबा ने अपने प्रचार या प्रसार के लिए  कोई संस्था  या साईं दर्शन जैसी तत्व बिबेचना करने वाली कोई शाखा नहीं बनायीं !
                   साईं बाबा का आगमन सन-१८३८ से १९१८ पर्यंत ८० वर्षो की काल मर्यादा में हिन्दू , मुसलमान तथा अन्य धर्मो के असंख्य भावुक लोगो को सन्मार्ग की ओर , कार्य , निसंदेह पुन्योतोया , भागीरथ के पवित्र अविरत प्रवाह की भाक्ति, सतत अदभुत  और रहस्य मय ढंग से चलता रहा !  
           श्री साईं बाबा का शिर्डी में आगमन , उस पत्थर पर, निम् के पेड़ के निचे  बैठना , वगैरह - वगैरह चीजे आज भी विद्मान है !श्री साईं बाबा के शारीर पर जो बस्तर होते थे ,उनकी उन्हें कोई सुध - बुध नहीं रहती थी !उनका आचरण एक दीवाने , सीडी मनुष्य के भाति ही रहता था ! सारा लोक भी उन्हें दीवाना फकीर ही समझता था और भरसक .. उपेक्षा  की भावना से देखते थे ! किन्तु संतो के उन्नति के मार्ग में यह भी एक अवस्था होती है ! भीख मांगना  और स्वंम बना कर खाना , उनके दिन चर्या थी !
           सभा में भक्तो की मन की बात जान लेना तथा उनके संसय का निवारण तुरंत बताना ....किसी  ईश्वरीय शक्ति से कम नहीं थी !जिसकी बात वह कह देते , वह उनके सामने बिना सीर झुकाए जा ही नहीं सकता था !श्री साईं बाबा के बारे में बिस्तृत जानकारी ..शिर्डी साईं संसथान के पुस्तकों को पढ़ने से पूरी तरह मील जाती है
     यात्रानुभाव ----  
                           अब आये इस यात्रा  के कुछ अनुभाव , जो मेरे साथ घटे ( तारीख-२-०३-२०११ से ५-०३-२०११ तक ) को आप
के सामने ,प्रस्तुत कर रहा हूँ !वैसे मै सपरिवार  शिर्डी प्रति वर्ष जाता हूँ ! उपरोक्त तिथि का प्रोग्राम भी मैंने एक माह पूर्व ही बना लिया था ! किन्तु कर्नाटक एक्सप्रेस का बर्थ कन्फर्म नहीं था ! अतः मैंने अपने बड़े पुत्र को ..इमरजेंसी  कोटा के लिए ..मंडल रेलवे मैनेजर आफिस में भेजा और कहा की सीधे जाकर ..मंडल आफिस के कमर्शियल  लिपिक  को दे देना ! काम हो जायेगा , किन्तु हुआ कुछ और ही ..रास्ते  में उसे ,उसके दोस्त के ..डैडी मिल गए , जो मंडल संचालन  मैनेजर के निजी सचिव है , उनहोने उस दरख्वास्त को लेकर ..मंडल संचालन मैनेजर को प्रेषित किया ..!  पैरवी के लिए ..! मैनेजर साहब ने पत्र को देखा ..तो सचिव से पूछे- "आप shaw को कब से जानते हो ?..shaw बहुत ही परेशान करने वाला ब्यक्ति है !"  शायद मेरे अनुशासन की सख्ती  , उन्हें कभी परेशानी में डाला हो ! वास्तव में लापरवाह लोग ,अनुशासन पसंद नहीं करते ! जो भी हो -फिर भी उन्होंने हस्ताक्षर कर दिया और हमारे बर्थ कंफर्म  हो गए ! हमने अपनी यात्रा पूरी की !  कोपरगाँव उतारे ! वहा  से ऑटो के द्वारा शिर्डी धाम पहुंचे ! शाम के साढ़े तीन बजने वाले थे ! इसी दिन  शिव रात्रि का भी पर्व था ...शिव की पूजा और साईं दर्शन की अभिलाषा  , साथ - साथ  थी ! अतः साईं संस्थान  द्वारा निर्मित आश्रम  में रूम के लिए चले गए ! जो अभी नव - निर्मित , व्  पूरी आधुनिक सुबिधा के साथ श्रधालुओ के लिए उपलब्ध है !   चित्र में देंखे -                                                                                                                       
द्वारावती भक्त निवास सामने का दृश्य ! निचे कार पार्किंग की भी सुबिधा उपलब्ध है !
अन्दर का परिदृश्य ..द्वारावती भक्त निवास --बहुत ही आधुनिक परिधान में सज्जित ! चार मंजिला ईमारत ! उप्पर जाने - आने के लिए बिद्युत सीढ़ी की  व्यवस्था ! वर्त्तमान में -वातानुकूलित का दर -२४ घंटे के लिए ..एक हजार रुपये और नान वातानुकूलित - २४ घंटे के लिए -५०० रुपये ! प्रति तीन ब्यक्ति ,एक्स्ट्रा ब्यक्ति के लिए पचास रुपये ..एक्स्ट्रा देने होते है !         द्वारावाती भक्त निवास के सामने बहुत ही सुन्दर --बागीचा !बच्चो के लिए बिशेष साधन !                                                        
एक खबर ---
02 March 2011      BLOGWORLD.COM

 वह जीवन क्या जिसकी कोई कहानी न हो.जी एन शा

उन आँखों का हँसना भी क्या..जिन आँखों में पानी ना हो । वो जिंदगी जिंदगी नहीं जिसकी कोई कहानी ना हो । जी हाँ यही मानना है । श्री जी एन शा जी का । जो इस जीवन रूपी यात्रा मे जाने कितने मुसाफ़िरों को उनकी मंजिल तक पहुँचा चुके हैं । और इसीलिये श्री शा जी जिंदगी को बेहद करीब से छूते हुये गुजरते हैं । प्रेरणादायी । परिश्रमी । भृष्टाचार रहित । समय का पाबन्द और अनुशासित होना ही उनका सिद्धांत है । इसी प्रकार की । सत्य पर आधारित..सत्य घटनायें । उनके ब्लाग्स पर मिलती है ।..मैं तो डर गया भाई । शा जी तो बहुत कङक हैं । मैं सोच रहा था । मस्का मार के..फ़्री रेल जर्नी..बट ही इज तो..करप्शन लैस मेन । एन्ड सेयस..I like discipline in all corner of life and society.Respect all good did and good people.Protest all evils.Hi please go through my all pages and enjoy.Thank u.Have a good moment..Is life more than water,air and fire ? वह जीवन..जीवन ही क्या जिसकी कोई कहानी न हो । बालाजी ओम साईंरामजी एम्प्लायमेंट ।
                                                                                                                                                                                                                            4 comments:
mridula pradhan said...
प्रेरणादायी । परिश्रमी । भृष्टाचार रहित । समय का पाबन्द और अनुशासित होना ही उनका सिद्धांत है । wah.is se achcha aur kya hoga.
Sawai Singh Raj. said...
मे रा ब्लॉग "AAJ KA AGRA" को भी अपने इस प्रयास में शामिल कर लेंना जी मेरा ब्लॉग का लिंक्स दे रहा हूं! http://rajpurohitagra.blogspot.com/
दर्शन कौर धनोए said...
राजीव जी के इस ब्लाक के जरिए हमे नित नए व्यक्तियों का परिचय मिलाता हे ..आज हमे जिस शख्सियत से आपने मिलवाया उनका कोई सानी नही वो लाजबाब हे.... श्री जी.ऍन शा साहब आपको बधाई |
रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...
ahut achha laga is parichay se milkar .....rajiv ji aabhar aapko ..
            


                                                                   


 

14 comments:

  1. बाबा के चरणों में शत शत नमन .आप सौभाग्यशाली हैं जो बाबा के दर्शन करतें हैं.यात्रावृतांत और चित्र बहुत रोचक लगे.'निर्मल मन जन जे मोहि पावा' आपका ह्रदय निर्मल है तभी बाबा बार बार आपको बुला लेते हैं.बाबा के चरित्र से यदि हम कुछ सीख पावें ,तो यह उन्ही की कृपा का प्रसाद होगा.जय साईं राम .

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  2. आपके ब्लाग की प्रशंसा पढ़ कर खुशी हुई.

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  3. आपने ठीक कहा है --बाबा जिसको बुलाते है वो दोडा चला जाता है --हम १९८६ में बालाजी के दर्शन करने गए थे मेरे साथ मेरी सहेली रुकमा भी सपरिवार थी हम दोनों को साथ ही बेटे हुए थे ( जिसकी अभी शादी हुई है ) बालाजी के दर्शन कर मेंसूर,बेगलोर,धूमकर हम वापस लोट रहे थे की ट्रेन में ही शिर्डी का प्रोग्राम बनाया और पूना उतर कर शिर्डी पहुँच गए --तबसे आज तक बाबा ने हम पर द्रष्टि नही डाली-- मै बाबा की बहुत मुरीद हु पर पता नही बाबा कब बुलाते हे --? आप बहुत भाग्यशाली है जो हर साल बाबा आपको बुलाते है--अगली बार जब आप जाए तो मेरी सिफारिश जरुर करे -- Dhanyvaad--

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  4. बाबा के चरणों मे प्रणाम!

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  5. सुन्दर तीर्थ वृत्तान्त।

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  6. धनोय जी ...मै जिस समय शिर्डी में था , उसी समय आप ने बालाजी ब्लोग्ग को फोल्लो किया था ! जब मै मंदिर प्रांगन में था तो सभी अनुसरण कर्ताओ के सुख -समृधि की दुआ मांगी थी ! जल्द ही बाबा आप की मनोकामना पूरी करेंगे !सब्र रंखे और आप की श्रधा जरुर पूरी होगी ! बाबा आप को जल्द ही बुलाएँगे !बुलाने के बाद हमें बताना न भूले ! ॐ साईं !

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  7. इस पावन स्थल का सुंदर चित्रण है यह पोस्ट...... सार्थक विचार उम्दा चित्र ....... आभार
    बाबा को शत शत नमन.....

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  8. नमस्कार शा जी । आपने साई बाबा जी के बारे
    में सचित्र और बेहतरीन लिखा । दिल से लिखा ।
    धन्यवाद ।

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  9. .

    @-वो जिंदगी जिंदगी नहीं जिसकी कोई कहानी ना हो । जी हाँ यही मानना है ... So true !

    साई बाबा ko mera shashtaang pranaam .

    ----

    Indeed Rajeev ji is doing a great job.

    .

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  10. बाबा के चरणों में शत शत नमन .आप सौभाग्यशाली हैं जो बाबा के दर्शन huve ... Lajawaab chitrmay post ... jai sai naam ...

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  11. naye prayog karte rahen ,rang halke rakhen,sampark badhta jaayega !

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  12. नमस्कार श्री G.N.SHAW जी ।
    आपके सुझाव के लिये धन्यवाद । ये जो टिप्पणी प्रोफ़ायल
    में फ़ोटो लगी है । ये मेरे परमपूज्य गुरुदेव सतगुरु श्री शिवानन्द
    जी महाराज परमहँस की है । मैं ( राजीव) उनका एक छोटा सा शिष्य
    हूँ । अतः कृपया आप मुझे " गुरूजी " के बजाय राजीव कहकर ही सम्बोधित
    किया करें । शेष फ़िर कभी..वैसे आपका पुत्तर " बालाजी " स्मार्ट है ।
    कभी आगरा भी ताज देखने आयें ।

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