Saturday, January 21, 2012

अंधेर नगरी चौपट राजा और दीप तले अँधेरा !

देश के महान विचारक एवं दार्शनिक स्वामी विवेकानंद ने कहा था - " कि अपने जीवन में सत्यता हेतु जोखिम उठाना चाहिए ! अगर आप कि विजय होती है , तो  आप अन्य लोगो का नेतृत्व करेंगे ! अगर आप पराजित होते है , तो अन्य लोगो को अपना अनुभव बता कर साहसी बनायेंगे !" 



                          एक बुजुर्ग प्लास्टिक के कचरे / बोतल बीनते हुए !
 उपरोक्त व्यक्ति को  चित्र में देखें -
 इस तस्वीर को मैंने लोको से ली थी ! उस समय जब देश में अन्ना हजारे का आन्दोलन तेज था ! लोकपाल के लिए मन्नत और विन्नत दोनों जोरो पर थे ! सत्यवादी  ईमानदार- समर्थक और लोलुप /लालची /बेईमान इस आन्दोलन से कन्नी काट रहे थे ! काट रहे है ! जैसे लोकपाल उनके आमदनी और बेईमानी पर कालिख पोत देगी !
 किन्तु इस तस्वीर को देखने से हमें बहुत कुछ जानकारी मिल जाती है ! 
क्या यह बुजुर्ग मेहनती नहीं है ?  क्या यह कोई चोर लगता है ?  क्या यह स्वार्थी है ? क्या पेट पालने के लिए , नाजायज तौर तरीके अपना रहा है ? क्या यह समाज का सेवा नहीं कर रहा है ? क्या इस तरह के लोगो कि दुर्दशा - समाज के लिए कलंक नहीं है ? क्या उत्थान कि दुन्दुभी पीटने वाली सरकारे --ऐसे लोगो के लिए कुछ नहीं कर सकती ? और भी बहुत कुछ , पर यह बृद्ध व्यक्ति निस्वार्थ ,दूसरो कि गन्दगी साफ करते हुए , जीने की राह पर अग्रसर है !
जीने के लिए तो बस --रोटी , कपड़ा और मकान ही ज्यादा है ! फिर इससे ज्यादा बटोरने की होड़ क्यों ? हमारे देश के लोकतंत्र में अमीर ...और अमीर ..तो गरीब ..और गरीब होते जा रहा है ! देश का लोक तंत्र बराबरी का अधिकार देता है , फिर धन और दौलत में क्यों नहीं ? क्यों १% लोगो के पास अरबो की सम्पति है ?  और  ९९% जनता - रोटी / कपड़ा/ मकान के लिए तरसती  फिरती  है ! इसे लोक तंत्र की सबसे बुरी खामिया कह सकते है ! 
लोगो के समूह से परिवार , परिवार से घर , घर से समाज ,समाज से गाँव , गाँव से शहर , शहर से और आगे बहुत कुछ बनता जा रहा है ! परिवार  को ही ले लें  एक ही घर में पति और पत्नी नौकरी करते मिल जायेंगे ! एक ही परिवार में कईयों के पास नौकरी के खजाने भरे मिलेंगे ! वही पड़ोस में एक परिवार बिलबिलाते हुए दिन गुजार रहे होंगे ! आखिर क्यों ? 
क्या सरकार ऐसा कोई बिधेयक नहीं ला सकती , जिसके द्वारा--
१) एक परिवार( पति - पत्नी और संताने  दो ) में एक व्यक्ति को ही नौकरी मिले !
२) नौकरी वाले  पति / पत्नी , में कोई एक ही नौकरी करे !
३) सरकार - सरकारी कर्मचारियों में लोलुप व्यवहार और आदत को रोकने के लिए - कुछ मूल भुत सुबिधाओ को मुहैया करने के लिए कदम उठाये , जिससे उनकी भ्रष्ट आदतों/ अपराधो  पर लगाम लगे  जैसे-नौकरी लगते ही ---
अ) घर की गारंटी !
बी)बच्चो की शिक्षा की गारंटी !
क)बिजली , पानी  और गैस की सुबिधा ! 
डी) मृत्यु तक स्वास्थ्य और सुरक्षा की गारंटी ! वगैरह - वगैरह 
४) धन रखने की सीमा निर्धारित हो ! जिससे की उससे ज्यादा कोई भी धन न रख सके !
५) सभी लेन- देन इलेक्ट्रोनिक कार्ड से हो !
६)बैंको में कैश की भुगतान न हो !
७)किसी भी चीज को बेचने या खरीदने का दर सरकार ही निर्धारित करें और उसके कैश भुगतान न हो केवल इलेक्ट्रोनिक भुगतान लागू हो !
उपरोक्त कुछ सुझाव मेरे अपने है !  टिपण्णी के द्वारा -आप इसे जोड़ या घटा सकते है ! संभवतः इस प्रक्रिया से कुछ हद तक  गरीबी दूर की जा सकती है ! भ्रष्टाचार दूर की जा सकती है !अपराध में कमी आ सकती है ! कुछ - कुछ होता है ! पर बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा ?
आज कल भ्रष्ट  का ही बोल बाला है ! भ्रष्टाचार  बढ़ और फल फूल रहा है ! इसके भी कारण स्वार्थ ही है ! स्वार्थ जो न कराये ! हम अमीर है ! हमारा देश सोने की चिड़िया है  ! इसीलिए तो एक डालर के लिए ५०.३५ रुपये( आज का भाव ) देते है ! गरीब देश थोड़े ही देगा ! फिर भी ..अंधेर नगरी चौपट राजा और  दीप तले अँधेरा !

29 comments:

  1. Sarkaar aur uske tantr se jude hajaaron log aisa hone nahi denge .... baaki ye kaary karna itna mushkil nahi ...

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    1. हद तक सही बात है !पर कुछ देशो में इस तरह के कुछ प्रावधान है , जिससे वह के लोगो में बेरोजगारी और निर्धनता नहीं है !

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  2. ये सारी बातें विचारणीय हैं... और बहुत कुछ बदल सकती हैं, पर सरकार के अपने स्वार्थ भी हैं |

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    1. स्वार्थी सरकार या राजतंत्र का बिगाड़ा रूप ही लोकतंत्र है ,इसमे सभी अपने - अपने क्षेत्र में आगे मिलेंगे चाहे चोर हो या सिपाही !धन्यवाद

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  3. Somnath jane ke rout ki jankari mujhe nahin hai..... :(

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    1. मोनिका जी आप गुजरात के सीमावर्ती राज्य से ताल्लुक रखती है अतः कोई जानकारी हो इसी लिये जानकारी चाही थी !धन्यवाद

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी लगाई है!
    सूचनार्थ!

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    1. डाक्टर साहब ..रविवार को मै शोलापुर गया था अतः चर्चा मंच पर न जा सका ! आज जा कर आता हूँ ..अभी इसीवक्त...धन्यवाद

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  5. BHAI SHAW JI ......NISHCHAY HI APKI SAMVEDNAYEN RASHTR KE NIHIT HAIN YATHARTH PARAK CHINTAN KE BAHUT HI PRERNADAYEE POST HAI ......BAHUT BAHUT ABHAR ....APKE BLOG TK AANA MERE LIYE ADHIK SARTHAK RAHA .

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    1. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद.

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  6. अंधेर नगरी अंधेर राजा ,टेक सेर भाजी टेक सेर खाजा ,
    समाज और अर्थ व्यवस्था आज के हालात के लिए दोषी .एक समाज के रूप में भी हम लगभग मृत प्राय :ही हैं .आस पड़ोस की किसी को चिंता नहीं घर में घर के प्राणी भी निरीह मिल जायेंगे .रिश्ते बे मानी ,बिन पानी .

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  7. भाई साहब ...धन्यवाद ! यदि मेरे लिखे जैसा हो जाये तो देश कैसा होगा ?

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  8. हमारे सिस्टम का नाम ही भ्रष्टाचार है. कोई इसे बदलना नहीं चाहता, राजनीतिज्ञ तो बिल्कुल नहीं.

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    1. सर जी बिलकुल सही ! धन्यवाद

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  9. नैतिक मूल्यों में गिरावट कि वजह से इंसान स्वार्थ में अंधा हो गया है। जिन्हे आपके अनुसार सारी सुविधायें प्राप्त हैं सामान्यतः वही सबसे ज्यादा
    भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

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  10. निशा जी .....बुद्धिजीवी ही दुसरे को नचाते है !बाकि तो बस दर्शक और ताली बजाने वाले ! आप मेरे ब्लॉग पर आयीं .. बहुत - बहुत धन्यवाद !

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    सादर
    एक ब्लॉग सबका '

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  12. क्यों १% लोगो के पास अरबो की सम्पति है ? और ९९% जनता - रोटी / कपड़ा/ मकान के लिए तरसती फिरती है ! इसे लोक तंत्र की सबसे बुरी खामिया कह सकते है !

    आपने एकदम सत्य लिखा है.लेकिन समस्या यह है कि राजनेताओं को ही कानून बनाना है और लोकपाल जैसे कानून उनके लिए पैर पर कुल्हाड़ी मारने या कुल्हाड़ी पर पैर मारने जैसा है जिससे वे बच रहे हैं....
    आपने जिस विधेयक की कल्पना की है वह तो फिलहाल दूर की कौड़ी ही लगती है.

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    1. इसे प्रचार करें तो वह दिन दूर नहीं जब यह स्वप्न पूरी हो जाएगी ! बहुत - बहुत आभार !

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  13. बिलकुल सही कहा आपने ,
    किसी घर में एक को भी नौकरी नहीं और किसी घर में आने वाली संतानों को भी नौकरी पहले मिल जाती है.... खैर........

    इलाही वो भी दिन होगा जब अपना राज देखेंगे
    जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा.

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  14. अलका जी प्रणाम ! बहुत सुन्दर ! आप का आभार

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  15. वाह! बहुत खूब लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!

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    1. धन्यवाद उर्मी जी !

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  16. बहुत ही उम्दा पोस्ट है देश की समस्याओं से रूबरू करवाती हुई ...

    गौ माता के लिए कुछ करने कदृष्टि से एक मंच का निर्माण हुआ

    आप भी सादर आमंत्रित है.....पधारियेगा....

    गौ वंश रक्षा मंच



    gauvanshrakshamanch.blogspot.com

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    1. अवंती जी बहुत - बहुत शुक्रिया !आप के ब्लॉग पर आऊंगा !

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  17. जाति,धर्म,संप्रदाय से हट कर जब तक मतदान नहीं करेंगे और धनवानों की पूजा-सत्कार बंद नहीं करेंगे कुछ भी बदलाव न कर सकेंगे। राजनीतिज्ञों को कोसना कायरों का काम है। ब्यूरोक्रेट्स ही भ्रष्टाचार के जनक-पोषक और संरक्षक हैं। ब्यूरोक्रेट्स/IAS की पत्नियाँ ही अधिकांश NGOs चलाती हैं जो काली कमाई के ही स्त्रोत हैं और इन्हीं एन जी ओज के ही सरगना हैं-अन्ना/रामदेव आदि सर्वाधिक भ्रष्ट लोगों के संरक्षक। ढोंग-पाखंड रहित जीवन-पद्धति को अपनाएं सभी संकटों का समाधान स्वतः हो जाएगा।

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  18. धन्यवाद गुरूजी और प्रणाम ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  19. आपके कई सुझाव बहुत अच्छे हैं खासकर एलेक्ट्रॉनिक भुगतान की बात विशेषकर पसन्द आयी।

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