जब ऐसी बात चल ही गयी तो एक वाक्या याद आ गया । कुछ वर्षों की बात है । गोआ और समुंद्री बीच । अरब सागर की लहरे उछाल मार रही थी और उन लहरो के बीच चार हसीन युवतियां - जिनके नाम - सुधा , पुष्पा , स्वाति और शिप्रा था - ठहाके और अठखेलिया करती हुई , पानी को अंजुली में भर कर - एक दूसरे के ऊपर छिड़क छिड़क कर मस्ती में मग्न टहल रही थी ।समुद्र ऐसे उछाले मार रहा था जैसे वह भी उनके ध्वनि में ध्वनि मिला रहा हो । अजीब दृश्य । भगवान भी तरस जाए ।
आसमान की किरणें सिर को छेद अपनी उपस्थिति की परिचय दे रही थी । फिर भी मस्ती में लीन युवतियों को सूर्य को रोशनी की छाया - ऐसे स्पर्श कर रही थी जैसे कोई प्रेमी अपने प्रेमिका को चूम लेने का प्रयास करता हो ।
इसी बीच एक सहेली जिसका नाम पुष्पा था , सभी को इशारा करते हुए बोली - यार चलो थोड़ी देर उस बृक्ष के नीचे बैठते है बहुत गर्मी है और सभी सहेलिया उस बृक्ष की ओर चल पड़ी । सभी के कपड़े जल से भींगे हुए थे । शरीर की बनावट प्रत्यक्ष दिख रहे थे । ईश्वर ने भी क्या चीज बनाई है एक औरत , जो समयानुसार सबल भी है और निर्बल भी ।बेचारा समुंदर देखते रह गया । कितना आनंदित था वह ।
समुंदर के किनारे वह बृक्ष भी अपने को धन्य कहते नही थका । औरत एक ऐसी प्राणी है जिसके संपर्क में सभी रहना चाहते है । तभी एक सहेली जिनका नाम सुधा था , अपनी मधुर वाणी से सभी को सम्मोहित करते हुये बोलीं - यार कोई आप बीती तो कोई सुनाओ । समय भी व्यतीत होगा और मनोरंजन भी ।
कोई आपबीती कहानी हो तो बड़ा मजा आएगा - शिप्रा ने गुदगुदी भरे शव्दों में कहा ।
बिल्कुल सही - स्वाति ने समर्थन किया । फिर सबसे पहले किसकी पारी ? - सुधा ने टोकते हुए कहा । इसमे कौन सी लड़ाई है यार , तुम ही कहो न । मिस्टर से जुड़ा कोई किस्सा - पुष्प ने डिंग भारी । बाकी सभी ने हा हा हा सुधा ही कहेंगी । हम लोगो की सीनियर भी है समर्थन किया ।
सुधा इनकार न कर सकी । सभी सहेलिया जानती थी कि सुधा की शादी हुए बहुत दिन हो चुके है और पर्सनल अनुभव भी बहुत होंगे ।
ठीक है मैं ही शुरू करती हूं सब लोग ध्यान से सुनना -सुधा ने कहा ।
Ok की ध्वनि दूसरी ओर से गुंजी ।
तो बात उस समय की है जब मेरे पति हैदराबाद में रहते थे और मैं यहाँ । मेरी सुंदरता चरम पर थी । कौन होगा जो बिन देखे रह जाये जब रास्ते से बाजार या कहीं और जा रही हूँगी ।
किन्तु ये सब मेरे पति को नामंजूर था । वो नही चाहते थे कि कोई मेरी पत्नी को गंदी नजरो से देखे । सुधा कुछ समय के लिए अपने शव्दों को विराम दे । गहरी सांसें खींची ।
फिर क्या हुआ यार - शिप्रा ने टोका ।
इसीलिए वो ऑन लाइन खरीददारी करते थे और सभी आवश्यक बस्तुओं को मेरे पते पर भेज देते थे । घर के अंदर सभी चीजों का स्टॉक भरपूर था । समझ में नही आता था कि अगले आने वाला समान को कहां रखु ।
मैं बार बार मना करती पर वो सब कुछ अनसुनी कर देते । समझ मे नही आता था कि इन्हें कैसे समझाऊ । फिर क्या था एक दिन मजाक मजाक में मैंने कह दिया कि लगता है बैंक एकाउंट अब सीज़ करना पड़ेगा । क्यों की हमदोनो की एक जॉइंट एकाउंट थी ।
उन्होंने हंसते हुए कहा- यार आप सीज़ करो या फ्रीज । मैं ख़रीददारी करके समान भेजता रहूंगा । मैं हैरान हो गयी । पूछी- ये कैसे ?
आप ही सोंच कर बताओ - उन्होंने कहा । और सोंचने के लिए 24 घंटे का समय भी दिए । मैं थोड़ी स्तबध रह गयी ।
मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी जानने की । फिर प्यार से पुचकारते हुए पूछी - कहियर जी । कैसे ये पॉसिबल है । वैसे मुझे ऑन लाइन की खरीददारी का अनुभव नही था । मेरे हठ कर बाद वो तैयार तो हुए किन्तु एक शर्त पर ।
कौन सी शर्त । किसी और ...........की कुछ तो नही ? स्वाति ने चिकोटी की लहजे में कहा ।
हो सकता है .....किसी बंधन से मुक्ति की - पुष्पा ने कहा जैसे आग में घी डाल दी हो । सभी को हंसी आ गयी ।
जल्दी बाते पूरी करो सुधा अभी तो स्वाति की चटपटी भी सुननी है - शिप्रा हंसते हुए बोली । स्वाति शिप्रा को ओठो बिदकते हुए बोली ।
सुधा ने आगे कहा कि -
उन्होंने एक शर्त रखी कि अगर मैं हार गई तो एक चीज देना होगा जो मैं मांगूगा । मरता क्या नही करता । मुझे उत्तर जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी । आखिर कौन सी वो चीज है ? ।
एक सेकेंड के लिए सुधा रुकी और अपने सहेलियों से ही पूछ बैठी - क्या आप लोग बताएंगी की कैसे खरीदते और मेरे हार स्वीकार करने के बाद उन्होंने क्या मांगी ।
सभी एक दूसरे की मुंह देखने लगी । क्षण भर के लिए सोंच की मुद्रा में । यार छोड़ो टेंशन मत दो । बताओ उत्तर । पुष्पा ने कहा ।
तो सुनो पतिदेव की वो पालिसी जिससे वो खरीदारी करते .......वो है........COD कैश ऑन डिलीवरी ।
वाह क्या पति मिला है यार सुधा । जबाब नही । सभी स्तब्ध । किसी के दिमाग मे ये ख्याल नही आया । पुष्पा ने कहा ।
अच्छा सुधा अब तो तुम हार चुकी थी शर्त के अनुसार उन्होंने क्या मंगा । हनीमून या और कुछ ... स्वाति मजकिये भाव से पूछ बैठी ।
मैंने कहा - कुछ नही यार । वेरी सिंपल । मेरे एकाउंट पर फ्रीज़ की प्रतिबंध को हटा लीजिये । सभी की हंसी गूंज उठी । वाह क्या पति मिला है यार । हार कर भी जीत गया ।
( साभार- gorakhnathbalaji.blogspot.com )



















